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नाटक और एकांकी में अंतर

  1 . नाटक में अनेक अंक होते हैं जबकि एकांकी में केवल एक अंक पाया जाता है। 2. डॉ . रामचरण महेंद्र के अनुसार एकांकी न तो बडे नाटक का संक्षिप्त रूप है , न कहानी , संभाषण। अतः नाटक प्रबंध काव्य या महाकाव्य के समान विस्तृत है , तो एकांकी मुक्तक के समान है। 3. नाटक में पात्रों के चरित्र चित्रण या उनके विकास के लिए पर्याप्त दृश्य और समय होता है। इसके विपरीत एकांकी में चरित्र के विकास या विस्तार की गुंजाईश नहीं होती। अतः पात्रों का चरित्र चित्रण एकाकी और एकपक्षीय होता है। 4. नाटक में कथावस्तु के विकास में कई मोड हो सकते है। जबकि एकांकी में भाव , प्रभाव , तीव्रता , गत्यात्मकता , संकलन - त्रय की योजना अनिवार्य है।   5. नाटक में गति विकास धीमा होता है जबकि एकांकी आरंभ होते             ही चरम परिणति की ओर द्रुत गति से भागना प्रारंभ करती है। 6. नाटक प्रायः दो , ढाई से लेकर तीन घं...

एकांकी नाटक

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नाटक

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आपका बंटी_ उपन्यास में वर्णित समस्याएं

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आपका बंटी- चरित्र-चित्रण

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आपका बंटी- कथावस्तु

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आपका बंटी - मन्नू भंडारी का जीवन परिचय

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उपन्यास और कहानी में अन्तर

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कहानियों के प्रकार

  कहानियों का प्रकार   कहानी जीवन का चित्र प्रस्तुत करती है, अत: कहानी के विषय भी उतने ही हो सकते हैं जितने जीवन के पक्ष्। जीवन ब्रह्म का ही प्रतिरूप है, अत: उसके विषय भी ‘हरि अनन्त हरिकथा अनन्ता’ की तरह अनन्त होंगे। फिर भी विद्वानों ने विषय की दृष्टि से कहानी की निम्न प्रकार माने हैं— 1)       सैद्धान्तिक कहानी 2)       ऐतिहासिक कहानी 3)       सुधारात्मक कहानी 4)       अद्भुतरम्य कहानी 5)       हास्यपूर्ण कहानी 6)       प्रेम कहानी 7)       मनोवैज्ञानिक कहानी 8)       आंचलिक कहानी 9)       बाल- जीवन से सम्बन्धित कहानी आदि।

उपन्यास के प्रकार

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